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preference shares क्या होते है ? किस तरीके की लोग परेफरेंस शेयर्स में इन्वेस्ट करते है ? इक्विटी शेयर्स या आर्डिनरी शेयर्स , कंपनी शेयर्स क्यों बेचती है ? प्रेफरेंस शेयर में क्या खास होता है? परेपरेफरेंस शेयर्स, इक्विटी शेयर्स या ऑर्डिनरी शेयर्स से कैसे निकलते है ?


कंपनी शेयर्स क्यों बेचती है ?

 शेयर्स--जब किसी कम्पनी को पैसों की जरूरत होती है तब उस कम्पनी के पास पैसा जमा करने के दो रास्ते हो सकते है  या तो वो कम्पनी डेट (उधार) ले सकती है या शेयर्स बेच कर पैसा जमा कर सकती है माना उस कम्पनी को डेट मिलने की कोई सम्भावना नहीं है या वो कम्पनी डेट नहीं लेना चाहती तब उस कम्पनी के पास शेयर के जरिए पैसा जमा करने का तरीका बचता है



 तब शेयर सेल (बेचके)  करने के केश में --

मान लेते है कि कोई कंपनी ABC शेयर्स बेच के पैसा जमा चाहती है कंपनी ABC की टोटल वैल्यूएशन 10 करोड़ है और वे 10 करोड़ को वे शेयर्स में बाट देती है

 शेयर्स में बटने पर देखते है कि शेयर होल्डिंग कितने टाइप की हो सकती है  ....

 सबसे पहले तो ओनर्स होते है जो 50 % शेयर्स होल्डिंग अपने पास रखना चाहते है 5 करोड़ की उनकी शेयर्स होल्डिंग हो गई बकीका वो कॉमन शेयर होडार से पैसा इक्ठटा करना चाहते है 35 % कॉमन शेयर होल्डर से करते है और बाकी का 15 % वो प्रेफेरंस शेयर इन्वेस्टर्स से जमा करते है ,

ओनर्स शेयर और कमान शेयर को इक्विटी शेयर्स या ऑर्डिनरी शेयर्स भी कहते है




प्रेफरेंस शेयर 

1.       डिविडेंड फिक्स्ड मिलता है जैसे कि बोंड में मिलता है लकिन प्रेफरेंस शेयर होल्डर को बोंड से थोडा ज्यादा डिविडेंड% मिलता है

2. स्टॉक मार्केट में परेफरेंस शेयर ट्रेड नहीं होते है इसी लिए शेयर प्राइस का कोई फर्क नहीं पड़ता परेफरेंस शेयर्स में इसलिए रिस्क भी बहुत कम होता है

3. परेफरेंस शेयर्स होल्डर को डिविडेंड में फर्स्ट प्रायोरिटी दी जाती है जब कम्पनी के पास टेक्स निकलने के बाद जो  प्रॉफिट आ जाता है उसमे डिविडेंड सबसे पहले परेफरेंस शेयर्स होल्डर्स को दिये जाते है

4.        जब कम्पनी बैंक करप्ट होती है या कम्पनी को बेचना पड़ता है तब कम्पनी के बिकने पर जो पैसा आता है उसमे इक्विटी शेयर्स होल्डर्स से पहले परेफरेंस शेयर्स होल्डर को पहले पेसे दिये जाते है

5.       परेफरेंस शेयर्स होल्डर के पास वोटिंग राइट्स नहीं होते है और वे मनेजमेंट का हिस्सा नही हो सकते है वो co-owners तो हो सकते है पर उनके पास कंट्रोल नहीं होता है


किस तरीके की लोग परेफरेंस शेयर्स में इन्वेस्ट करते है

1. फाइनेंशियल इंस्टिट्यूट 

2. वेल्थी इंडिविडुअल्स 

3. प्राइवेट इक्विटी फर्म 

4. फॅमिली ओफ्फिसस


परेपरेफरेंस शेयर्स से कैसे निकलते है ?

1. कम्पनी बायबैक करती है- अगर शेयर सर्टिफिकेट में बायबैक का ऑप्शन है तो जब भी कम्पनी बायबेक करती है परेफरेंस शेयर्स से निकल सकते है 

2. स्टॉक मार्केट में सेल-अगर शेयर सर्टिफिकेट में कॉमन इक्विटी शेयर्स में कन्वर्ट का ऑप्शन है तो कॉमन इक्विटी शेयर्स में कन्वर्ट करके स्टॉक मार्केट में सेल कर सकते है




इक्विटी शेयर

1.       इक्विटी शेयर्स होल्डर के डिविडेंड फिक्स्ड नही होती है, कम्पनी के प्रॉफिट के हिसाब के डिविडेंड दिये जाते है अगर कम्पनी की पालिसी डिविडेंड न देने की है तो कम्पनी डिविडेंड नहीं भी देती है

2.       इक्विटी शेयर्स स्टॉक मार्किट में ट्रेड करते है और स्टॉक प्राइस से ही इन्वेस्टर को प्रॉफिट या लोस होता है इसी लिए इक्विटी शेयर्स में रिस्क ज्यादा होता है

3. टैक्स निकलने की बाद जो भी प्रॉफिट बचता है वो सबसे पहले पेफेरेंस शेयर्स होल्डर को दिया जाता है फिर इक्विटी शेयर्स होल्डर्स को दिया जाता है इक्विटी शेयर्स होल्डर्स को दिया जाने वाला प्रॉफिट डिविडेंड के रूप में हो सकता है  या शेयर प्राइस इनक्रीस के रूप में भी हो सकता है 

4.       जब कम्पनी बैंक करप्ट होती है या कम्पनी को बेचना पड़ता है तब कम्पनी के बिकने पर जो पैसा आता है उसमे इक्विटी शेयर्स होल्डर्स को सबसे आखरी में पेसे दिये जाते है

5.       इक्विटी शेयर्स होल्डर के पास वोटिंग राइट्स होते है और वे मनेजमेंट का हिस्सा भी हो सकते है वो co-owners तो होते है साथ ही उनके पास कंट्रोलभी होता है चाहे कितना भी छोटा इन्वेस्टर हो उसके पास वोटिंग राईट जरुर होता है


किस तरीके की लोग इक्विटी शेयर्स या आर्डिनरी शेयर्स में इन्वेस्ट करते है ?

1. रिटेल इन्वेस्टर 

2. फाइनेंशियल इंस्टिट्यूट 

3. वेल्थी इंडिविडुअल्स 

4. प्राइवेट इक्विटी फार्म 

5. फॅमिली ओफ्फिसस


इक्विटी शेयर्स या ऑर्डिनरी शेयर्स से कैसे निकलते है ?

1. शेयर मार्केट में सेल करके-इक्विटी शेयर या ऑर्डिनरी शेयर को शेयर मार्केट में सेल करके इक्विटी शेयर या ऑर्डिनरी शेयर से निकल सकते है 

2.कम्पनी द्वारा बायबैक- इक्विटी शेयर या ऑर्डिनरी शेयर से तब भी निकला जा  सकता है जब कम्पनी बायबैक करती है 




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